भारत की प्रमुख खाद्य फसलों के बारे में तथा ऋतुएँ के आधार पर फसलों की बुआई | Type of Crops in India – Major crops in India

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Type of Crops in India – Major crops in India

नमस्कार दोस्तों ! स्वागत है आपका कैरियर जानकारी में। फ्रेंड्स आज हम आपको बताने वाले हैं भारत की ऋतुओं के आधार पर फसलों Major crops in India के बारे में। दोस्तों हमें अपने भारत देश की भौगोलिक दशाओं , जलवायु तथा उनके आधार पर होने वाली फसलों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। यदि दोस्तों आप अपने देश की भौगोलिक अवस्थाओं को जानना चाहते हैं तो इस ब्लॉग को अंत तक पढ़िये। इस जानकारी के माध्यम से आप अपनी leaning skills को बढ़ा सकते हैं तथा विद्यालय की परीक्षाओं और कौम्प्टेटिव एक्साम में अच्छे अंक ला सकते हैं।

Major crops in India

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हमें अपने भारत देश की भौगोलिक दशाओं , जलवायु तथा उनके आधार पर होने वाली फसलों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। यदि दोस्तों आप अपने देश की भौगोलिक अवस्थाओं को जानना चाहते हैं तो इस ब्लॉग को अंत तक पढ़िये।

कृषि से तात्पर्य :-

कृषि एक ( Primary Activity) प्राथमिक क्रिया है, जो हमारे लिए खाद्यान व वानीजयिक फसलें उत्पन्न करती है अर्थात कृषि से हमारा तात्पर्य जलवायु के अनुकूल फसलों की उपज कराना। कृषि को भारतीय आर्थिक व सामाजिक जीवन का आधार, रोजगार का प्रमुख स्त्रोत तथा विदेशी मुद्रा अर्जन का माध्यम होने के कारण देश की आधारशिला कहा जाता है। भारत में अति प्राचीनकाल से अधिकांश खाद्यान के रूप में एवं परम्परागत रूप से कृषि की जाती रही है।  

भारत में तीन शस्य ऋतुएँ :-

(1) रबी की फसल

(2) खरीफ की फसल

(3) जायद की फसल

भारत में मुख्यत: तीन प्रकार की फसलों की बुआई की जाती है।

रबी की फसल ( शीतकालीन फसल) :-

रबी फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर व नवम्बर के मध्य बोई जाती है और ग्रीष्म ऋतु में मार्च व अप्रैल के मध्य काटा जाता है। गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों, मसूर और आलू आदि रबी की फसलें हैं। यद्यपि ये फसलें देश के विस्तृत भाग में उगाई जाती हैं परंतु उत्तर और उत्तर पश्चिमी राज्य जैसे – पंजाब, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश गेहूँ और अन्य रबी फसलों के उत्पादन में अग्रणी राज्य है।

शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में हरित क्रांति की सफलता भी उपर्युक्त रबी फसलों की वृद्धि में एक महत्वपूर्ण कारक रही हैं।

खरीफ फसल ( ग्रीष्म कालीन फसल ) :-

खरीफ फसले देश के विभिन्न क्षेत्रों में मानसून के आगमन के समय जून – जुलाई के साथ उगाई जाती है और अक्टूबर – नवम्बर में काट ली जाती है। इस ऋतु में बोई जाने वाली मुख्य फसलों में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली और सोयाबीन शामिल हैं।

चावल की खेती मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, उडीसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में चावल, पंजाब और हरियाणा में भी उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल बन गई है। असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसले ऑस , अमन और बोरो उगाई जाती हैं।

जायद फसल ( शीत एवं ग्रीष्म के मध्य ) :-

रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में उगाई जाने वाली फसल को जायद फसल कहा जाता है। जायद ऋतु में मुख्यत: तरबूज, खरबूजा, खीरा, सब्जियां और चारे की फसलों की खेती की जाती हैं। यद्यपि इस प्रकार की फसल ऋतुएँ देश के दक्षिणी भागों में नहीं पाई जाती हैं, क्योंकि वहाँ की अधिकतम तापमान वर्ष भर किसी भी उष्ण कटिबंधीय फसल की बुआई में सहायक है, केवल इसके लिए पर्याप्त आर्द्रता उपलब्ध होनी चाहिये। देश के इस भाग में जहाँ भी पर्याप्त मात्रा में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहाँ एक कृषि वर्ष में एक ही फसल तीन बार उगाई जा सकती है।

प्रमुख खाद्यान फसलें( Major Crops) :-

गेहूँ, चावल, मक्का और बाजरा मुख्य खाद्य फसलें हैं। जूट और कपास रेशेदार फसले हैं एवं चाय व कहवा मुख्य पेय फसलें हैं भारत में कुल बोये गए क्षेत्र के लगभग 54 प्रतिशत भाग पर अनाज का उत्पादन होता है।

भारत में दो प्रकार का गेहूं उगाया जाता है।

सामान्य रोटी का गेहूँ ( Triticum Aestivum)

सामान्यरोटी का गेहूँ सफेद रंग का एवं मुलायम होता है, जिसे भारत के उत्तरी मैदानी भाग में उगाया जाता है।

मैकरोनी गेहूँ ( Triticum Durum) :-

भारत में चावल के बाद गेहूं दूसरा प्रमुख अनाज है।भारत विश्व का 13.1 % गेहूँ उत्पादन करता है। विश्व में गेहूं उत्पादन में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। गेहूं की फसल की वृद्धि के समय तापमान एवं मध्यम वर्षा जबकि फसल की कटाई के समय तेज धूप की आवश्यकता होती है।गेहूँ का विकास सु अपवाहित दोमट मृदा में सर्वोत्तम ढंग से होता है। भारत का अधिकांश गेहूँ भारत के विशाल मैदान की जलोढ़ काँप की मिट्टियों में उगाया जाता है। भारत में गेहूं की उपादक्ता बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिक द्वारा गेहूं की अनेक बौनी प्रजातियों का विकास किया गया है। जिनमें लर्मा, रोजो 64 , सोनारा 63 , सोनारा 64 , मेया64 का परीक्षण देश के गेहूं उपादक्त राज्यों में किया गया है।नोरिन10 गेहूँ में बौनेपन का जीन है।

गेहूं की कुछ अन्य प्रजातियाँ या किस्म इस प्रकार हैं – सोनालिका, अर्जुन, कुंदन, अमर, भवानी, चंद्रिका, प्रभानी, कल्याण, सोना, मैक्रोनी आदि।

गेहूं की फसल रोग :-

पीला किट ( Yellow Rust) , भूरा किट ( Brown Rust) , काला किट ( Black Rust)

मोटे अनाज :-

ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाये जाने वाले प्रमुख मोटे अनाज है।इनमे पोषक तत्वों की मात्रा अत्यधिक होती है। उदाहरणत: रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम एवं सूक्ष्म पोषक तत्व मिलते हैं।

भारत में अधिकांश पिंटल किस्मकी मक्का उगाई जाती है। जबकि राजस्थान तथा हिमांचल प्रदेश में डेंट किस्म भी उगाई जाती है।

दलहन ( Pulses ) :-

भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है।दालें अधिकांश फलीदर फसलें होती हैं तथा प्रोटीन से भरपूर होती हैं। चना तथा अरहर प्रमुख दलहनी फसलें हैं। उड़द, मूंग, मसूर, मटर, खेसारी, मोठ आदि अन्य दल्हानि फसले हैं। ये फसलें शस्यावर्टन द्वारा मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अत: इन फसलों को समान्यत: अन्य फसलों के आवर्तक में बोया जाता है।

दलहनी फसलों में वायु से नाइट्रोजन संचित करने की क्षमता होती है।राइजोबियम जीवाणु दलहनी फसलों की जड़ों में पाया जाने वाला बैक्टीरिया है। इन फसलों के लिए कोबाल्ट आवश्यक तत्व है। कोबाल्ट राइजोबियम जीवाणु हेतु नाइट्रोजन स्थरी करण के लिए आवश्यक तत्व हैं। तथा विटामिन B12 के सन्शलेषण में सहायक होता है । यह प्रकाश संश्लेषण, वासपोत्सर्जन एवं वृद्धि के लिए आवश्यक है। शुष्क क्षेत्रों में वर्षा आधारित फसल होने के कारण दालों की उत्पादकता कम है तथा इसमें वार्षिक उतार चढ़ाव पाया जाता है।

तिलहन (Oilseeds) :-

तिलहन वसा का प्रमुख स्त्रोत तथा भोजन पकाने का प्रमुख माध्यम है।इसके अंतर्गत मूंगफली, अलसी, अरंडी, तिल, सोयाबीन, सूरजमुखी, लाई, बिनौला, नाइजर आदि सम्मलित है। इन फसलों में तेल तथा खली प्राप्त किया जाता है, जिसका प्रयोग स्नेहक पदार्थ जैसे मोमबत्ती, साबुन, इत्र, खाद, औषधि पशुओं का भोजन बनाने में प्रयोग होता है। देश के कुल शस्य क्षेत्र के लगभग 14% भाग पर तिलहन फसलें बोई जाती हैं। भारत में तिलहन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य गुजरात है। इसक बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान का नाम आता है।

कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण क्रांतियाँ :-

(1) हरित क्रांति – खाद्य उत्पादन

(2) सुनहरी क्रांति – फल एवं सब्जी उत्पादन

(3) श्वेत क्रांति – दुग्ध उत्पादन

(4) कृष्ण क्रांति – खनिज तेल के क्षेत्र में आत्म निर्भरता

(5) नीली क्रांति – मत्स्य उत्पादन

(6) गोल क्रांति – आलू उत्पादन

(7) भूरी क्रांति – उर्वरक उत्पादन

(8) पीली क्रांति – तिलहन उत्पादन

(9) रजत क्रांति – अंडा उत्पादन

(10) इंद्रधनुषी क्रांति – कृषि संबंधित समगृ क्रांति

(11) अमृत क्रांति – नदियों को जोड़ने की योजना

(12) सदाबाहर क्रांति – कृषि उत्पादन को दोगुना करना

(13) गुलाबी क्रांति – प्याज उत्पादन

(14) लाल क्रांति – मांस या टमाटर उत्पादन

कृषि के विशेष प्रकार :-

विश्व के वर्तमान कृषि व्यवस्था में व्यापक स्तर की विभिन्न कृषि पद्यति के अतिरिक्त कुछ विशेष कृषि प्रकार भी प्रचलित है-

(1) विटीकल्चर – अंगूरों का व्यापारिक स्तर पर उत्पादन।

(2) पिसीकल्चर – व्यापारिक स्तर पर की जाने वाली मछली पालन की क्रिया।

(3) सेरीकल्चर – रेशम उत्पादन की क्रिया।

(4) हर्टिकल्चर – विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन।

(5) औलिवीकल्चर – जैतून की कृषि।

(6) आरबरीकल्चर – विशेष प्रकार के वृक्षों, झाड़ियो की कृषि

(7) एपी कल्चर – शहद उत्पादन हेतू मधुमक्खी पालन।

(8) फ्लोरीकल्चर – फूलों की खेती।

(9) सिल्वीकल्चर – वनों के संरक्षण तथा संवर्धन से संबंधित क्रिया।

(10) ओलेरीकल्चर – जमीन पर फैलने वाली सब्जियों की व्यापारिक खेती।

(11) मेरीकल्चर – समुद्री जीवों के उत्पादन की क्रिया।

(12) पोमोलोजी — फल विज्ञान।

(13) मोरीकल्चर – रेशम कीट हेतु शहतूत की कृषि।

Conclusion :-

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