अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2021 निबंध आसान शब्दों में (21 फरवरी) – International Mother Language Day Essay in Hindi

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International Mother Language Day Essay in Hindi

आज के इस पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2021 निबंध आसान शब्दों में दिया गया है , अगर आप भी International Mother Language Day Essay in Hindi ढुंढ रहे हैं तो , नीचे दी गई है ।

International Mother Language Day Essay in Hindi

International Mother Language Day (21 February)

प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस के मनाने का उद्देश्य है भाषाओं और भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, लेकिन आज हम भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग का संकल्प कर सकते हैं।

युनेस्को ने सन् 1999 में प्रतिवर्ष 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी। तब से लेकर आज तक हर साल 21 फरवरी को इसे मनाया जाता है। यूनेस्को ने दुनिया भर के विभिन्न देशों में उपयोग की जाने वाली (पढ़ी, लिखी और बोली जाने वाली) 7000 से अधिक भाषाओं की पहचान की है और इस साल के सेलिब्रेशन में इसका खास ध्यान में रखा गया है। यूनेस्को के अनुसार, ‘स्थानीय, क्रॉस-बॉर्डर भाषाएं शांतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा दे सकती हैं और स्वदेशी विरासत को संरक्षित करने में मदद कर सकती हैं।’

यूनेस्को से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार “विश्व में बोली जाने वाली लगभग 6000 भाषाओं में से 43% भाषा धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं। वहीँ केवल कुछ सौ भाषाओं को ही शिक्षा और सार्वजनिक कामकाज की भाषा के रूप में जगह दी गई है, जबकि सौ से भी कम भाषाएं डिजिटल दुनिया में इस्तेमाल की जाती हैं। भूमंडलीकरण (Globalisation) विभिन्न भाषाओं के विभिन्न खतरों को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार, इसलिए हम सभी को मिलकर अपने क्षेत्र, राष्ट्र और दुनिया की भाषाई विविधता को बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए।  

भारत में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा मनाने का उद्येश्य :-

इस दिवस को मनाने का उद्येश्य विश्व में भाषायी और सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा देना है। इस संदर्भ में भारत की भूमिका और भी अधिक मायने रखती है, क्योंकि भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है , इसके नाते भारत का उत्तरदायित्व मातृभाषाओं के प्रति कहीं अधिक मायने रखता है। भारत में द्विभाषिकता एवं बहुभाषिकता का प्रचलन है। भारत में भाषाओं को लेकर बात विवाद होते चले आये हैं और चलते भी रहते हैं। खासतौर पर भाषायी द्वंद राजभाषा हिंदी और देश की अन्य शेष भाषाओं के बीच बना ही रहता है। गैर हिंदी भाषीयों का हमेशा इल्जाम रहता है कि उन पर हिंदी थोपी जाती है। वहीं हिंदी भाषी कभी भी देश की अन्य भाषाओं को सीखने के प्रति उत्सुक रहते हैं, न ही कोई संवेदनशीलता रखते हैं कि भारतीय भाषाओं के बीच लोगों द्वारा स्थापित कर दिया गया वैम्नस्य समाप्त हो सके।

भाषाओं को लेकर भारत में जो माहौल है,उसके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस जैसे विषय बहुत अधिक प्रासंगिक होते हैं। ऐसे दिवसों का आयोजन लोगों में अपनी व अन्य जनों की मातृ भाषा के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना उत्प्रेरित करते हैं।

बहुभाषी हैं हम
हाल ही में जारी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जिनकी मातृभाषा हिंदी या बांग्ला है, उनमें बहुभाषियों की संख्या कम है। 43 करोड़ हिंदी भाषी में 12 फीसद लोग द्विभाषी हैं और उनकी दूसरी भाषा अंग्रेजी है। जबकि बांग्ला बोलने वाले 9.7 करोड़ लोगों में 18 फीसद द्विभाषी हैं। हिंदी और पंजाबी के बाद बांग्ला भारत में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। देश में 14 हजार लोगों की मातृभाषा संस्कृत है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा का इतिहास :-

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस की नींव बांग्लादेश के ढाका में 1952 में हुए छात्रों के आंदोलन से रखी गई थी। इस आंदोलन में छात्रों ने अपनी मातृभाषा बंगला (जो बांग्लादेश में बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोली जाती थी) को राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन और रैलियां की थीं। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद पाकिस्तानी सरकार ने उर्दू को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) और पश्चिम पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषा घोषित कर दिया था। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों ने अपनी मातृभाषा के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया। सरकार ने 1956 में बंगला को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की आधिकारिक भाषा का दर्जा दे दिया था। हालांकि 1971 में बंगलादेश को स्वतंत्र मिली, लेकिन देश में अभी भी 21 फरवरी को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है और अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।
यूनेस्को ने इस संघर्ष में शहीद हुए युवाओं की याद में 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा मनाने का महत्व :-

मातृभाषा वह भाषा है जो मनुष्य बचपन से मृत्यु तक बोलता है । घर परिवार में बोली जाने वाली भाषा ही हमारी मातृभाषा है । भाषा संप्रेषण का एक माध्यम होती है जिसके द्वारा हम अपने विचारों का आदान प्रदान करते है और अपनी मन की बात किस के समक्ष रखते है । जो शब्द रूप में सिर्फ अभिव्यक्त ही नहीं बल्कि भाव भी स्पष्ट करती है । एक नन्हा सा बालक अपनी मुख से वही भाषा बोलता है जो उसके घर परिवार में बड़े लोग बोलते है । इस भाषा का प्रयोग करके वह अपने विचारों को अपने माता पिता को अपनी मुख से उच्चारण करे बताता है । उसका भाषा ज्ञान सीमित होता जाता है । भाषा ज्ञान की प्राप्ति का वह मार्ग है जिसके जरिये व्यक्ति दैनिक जीवन मे प्रयोग करके सफलता प्राप्त करता है । भाषा के बिना मनुष्य जानवर के समान है जो देख तो सकता है पर अपने अन्दर छुपी भावनाओं को कह नही सकता ।

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