पुस्तकालय पर निबंध – Essay on Library in Hindi | पुस्तकालय के लाभ पर लेख – Library Essay In Hindi

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Essay on Library in Hindi

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका कैरियर जानकारी में। दोस्तों आज के टॉपिक के जरिये मैं आपको बताने वाली हूँ पुस्तकालय यानि लाइब्रेरी के महत्व के बारे में। पुस्तकालय हमारे विद्यार्थी जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। क्योंकि यहां पर ज्ञान विज्ञान ग्रंथ साहित्य राजनीतिक विज्ञान एवं अलग-अलग भाषाओं का संग्रह होता है। इसके द्वारा हम अधिक से अधिक ज्ञान संग्रह कर सकते हैं।

Essay on Library in Hindi

तो दोस्तों यदि आप भी पुस्तकालय की महत्वता के बारे में जानना चाहते हैं तो इस ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़िये। विद्यार्थी पुस्तकालय के माध्यम से ज्ञान अर्जित कर आगे आने वाले जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सकते है।

पुस्तकालय का अर्थ –

पुस्तकालय दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। पुस्तक + आलय जिसका अर्थ होता है पुस्तकों या किताबों का घर या मंदिर। कहा जाता है कि ‘ ज्ञान ही ईश्वर है तथा सत्य एवं आनंद है’ । जिस प्रकार से शरीर को स्वस्थ रूप से चलाने के लिए उत्तम भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए उच्च कोटि के ज्ञान की आवश्यकता होती है और इसकी प्राप्ति पुस्तकों के अध्ययन करने से होती है। अध्ययन करने से मानव मस्तिष्क का विकास होता है, दिमाग में नये – नये विचार आते हैं। अध्ययन करने के लिए हमें ज्ञानवर्धक और उच्च कोटि के लेखकों द्वारा लिखी हुई पुस्तकों की आवश्यकता होती है ।

विभिन्न प्रकार की अलग – अलग क्षेत्रों की पुस्तकें हमें पुस्तकालय में ही प्राप्त हो सकती हैं । और उनसे ज्ञान अर्जित किया जा सकता है। प्राचीन काल में पुस्तकों का प्राइस अधिक होता था और साधारण व्यक्ति उन्हें खरीद कर पढ़ नहीं पाता था और किताबें आसानी से मिल भी नहीं हो पाती थी इसीलिए पुस्तकालय की स्थापना की गई।

पुस्तकालय की उपयोगिता –

पुस्तकालय हमारे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में होते हैं। प्राचीन काल में पुस्तकें आजकल के पुस्तकालयों की तरह एक जगह नहीं होती थीं वरन प्राचीनकाल में पुस्तकें हस्तलिखित हुआ करती थीं । इसलिए इन पुस्तकों का उपयोग केवल एक ही व्यक्ति कर पाता था । इन पुस्तकों का अध्ययन आम जनता नहीं कर पाती थी, बड़े घराने के लोग ही पुस्तकालयों में हस्त लिखित ग्रंथों का अध्ययन किया करते थे। परंतु अब माहौल अलग है अब पुस्तकालय में जाकर प्रत्येक व्यक्ति अध्ययन कर सकता है। दूसरी बात यह कि प्राचीनकाल में पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करना एक बड़ा कठिन कार्य होता था; क्योंकि पुस्तकें आज जितनी प्रकार की एक ही जगह मिल जाती हैं; उतनी तब नहीं मिलती थीं । साधन सीमित थे।

पुस्तकालय की मानव जीवन में अत्यंत अहम भूमिका है । पुस्तकालय के कारण मानव जीवन में शिक्षा ने अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। लाइब्रेरी के वजह से गरीब तबके के विद्यार्थियों को भी अच्छी किताबें पढ़ने को मिली है जिससे चारों ओर सामाजिक और आर्थिक विकास भी हुआ है। और मानव ने एक अलग नजरिये से सोचना शुरू कर दिया है। लाइब्रेरी की मुख्य विशेषता यह है कि पाठकों को तर्कशील, अंतर्मुखी और चिंतनशील बनाते है। यदि कोई व्यक्ति मन लगाकर अध्ययन करता है, और उसके सारे अच्छे गुणों को अपनाता है, तो वह व्यक्ति स्वयं का दोबारा से निर्माण करता है।

पुस्तकालय के प्रकार –

पुस्तकालय के कई प्रकार हैं, जो कि निम्न लिखित हैं –

(1) स्कूल पुस्तकालय

(2) निजी पुस्तकालय

(3) सार्वजनिक पुस्तकालय

(4) चल पुस्तकालय

(5) डिजिटल पुस्तकालय

(1) स्कूल पुस्तकालय –

विद्यालय पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्कूल पुस्तकालय शिक्षा प्रणाली में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्कूली पुस्तकालय में पुस्तकालय अध्यक्ष तथा उनके सहकर्मी रहते हैं। विद्यालयों में माध्यमिक स्तर तक दो तरह की पुस्तकें होती हैं। प्रथम बुक बैंक की पुस्तकें और दूसरी सामान्य पुस्तकें। बुक बैंकों की पुस्तकों में किताबों के सलेबस् संबंधी पाठ्यक्रम होता है। तथा सामान्य किताबों में अतिरिक्त ज्ञान तथा विज्ञान संबंधी, मनोरंजन संबंधी या उपन्यास कई प्रकार की किताबें होती हैं। स्कूलों में बुक बैंक की पुस्तकें तथा सामान्य पुस्तकें बच्चों व अध्यापकों को उधार पढ़ने को दी जाती हैं , और एक निशिचित् अवधि तक।

इसके अतिरिक्त स्कूली पुस्तकालय में समाचार पत्रिका, मासिक पत्रिका आती हैं, जिनको छात्र व अध्यापक लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ते हैं। आजकल लाइब्रेरी में ऑडियो, वीडियो लेक्चर कंप्यूटर में पढ़े होते हैं, इन्हें बच्चे अपने टीचर के लेक्चर पढ़ सकते हैं।

(2) निजी या प्राइवेट पुस्तकालय –

व्यक्तिगत पुस्तकालय वह पुस्तकालय हैं जो स्वयं के पढ़ने के लिए हों और परिवार के लिए। अर्थात प्राइवेट पुस्तकालय उस श्रेणी में आते हैं , जो लोग अपने घरों की चाहरदीवारी में बैठ कर पढ़ते हैं। इसमें बाहर के लोगों की दखलनदाजी नही होती हैं। न ही ये पुस्तकें उधार दी जाती हैं। लोग अपने शौक के लिए भी व्यक्तिगत पुस्तकालय बनाते हैं, जिन्हे घर में रह कर पुस्तको को पढ़ना पसंद होता है।

(3) सार्वजनिक या पब्लिक पुस्तकालय –

जिन पुस्तकालयों का संचालन सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा होता है वे सार्वजनिक पुस्तकालय होते हैं। और कुछ सरकार के अनुदान द्वारा चलाए जाते हैं यहां पर कोई भी व्यक्ति आकर पुस्तके पढ़ सकता है। आज के समय में गाँवों में भी ग्राम पंचायतों द्वारा सभी विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए पब्लिक पुस्तकालय चलाये जा रहे हैं ।

(4) चल पुस्तकालय –

आजकल चल पुस्तकालय बड़े ही फेमस हो रहे हैं। इसक अंतर्गत बड़े – बड़े मोटर वाहनों जैसे कार, ऑटोरिक्शा, ट्रक आदि में लाइब्रेरी बनाई जाती है और इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। एक गाँव से दूसरे गाँव, एक कस्बे से दूसरे कस्बे, एक शहर से दूसरे शहर में आते जाते रहते हैं। इन पुस्तकालयों में सेकेंड हैंड की भी पुस्तकें होती हैं लोग जरूरत के अनुसार इनसे कम दाम में खरीद सकते हैं। इस प्रकार चल पुस्तकालय से शिक्षा का बहुत तेजी से प्रसार हो रहा है।

(5) डिजिटल पुस्तकालय –

वर्तमान डिजिटल प्रणाली ने समूचे विश्व पर अपना कब्जा कर रखा है। इंटरनेट व्यवस्था और मोबाइल के सस्ते होने के कारण ज्यादातर लोग किताबों को मोबाइल और कंप्यूटर पर पढ़ना पसंद करते है। और इसका दूसरा कारण कहीं पर भी किताबों को ले जाने की आवश्यकता नहीं है, अब तो पॉकेट में ही लाइब्रेरी रहती है। अब तो कहीं भी किसी भी समय पर अध्ययन कर सकते हैं।

भारत में पुस्तकालय –

भारत में पुस्तकालय कई राज्यों में स्थित हैं जोकि कुछ निम्नलिखित हैं-

उत्तर प्रदेश – मौलाना अबुल कलाम आजाद

पश्चिम बंगाल – नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया

नई दिल्ली – दयाल सिंह लाइब्रेरी तथा जामिया हमदर्द लाइब्रेरी

पटना – खुदा बख्श ओरियंटल लाइब्रेरी , सिन्हा लाइब्रेरी आदि

आंध्रप्रदेश – गौतमी गन्धरालायम पुस्तकालय

पणजी – गोवा सेंट्रल लाइब्रेरी

निष्कर्ष –

पुस्तकालय ज्ञानकोष है जो हमें ज्ञान प्रदान करता है। मानव के व्यक्तित्व के निर्माण में पुस्तकालयों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है । अनुशासित जीवनशैली, एकांत व एकाग्रचित वातावरण, आराम से पुस्तकों का अध्ययन करना पुस्तकालय से प्राप्त होता है । अगर कोई व्यक्ति को पुस्तकों का अध्ययन करने का शौक है, तो उसे लाइब्रेरी अवश्य जाना चाहिए। देश विदेश के लेखकों की विभिन्न विषयों एवं विभिन्न भाषाओं पर लिखी हुई पुस्तकें आसानी से पुस्तकालय में मिल जाती हैं।

दोस्तों आशा करती हूँ पुस्तकालय के महत्व पर लिखा गया लेख अवश्य आपको पसंद आया होगा , अगर दोस्तों ब्लॉग पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें, और अपने अनुभव कमेंट बॉक्स में साझा करें। धन्यवाद दोस्तों।

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