शिक्षा का महत्व पर निबंध – Importance of Education in Hindi | शिक्षा का महत्व पर निबंध हिंदी में | Essay on Importance of Education in Hindi

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Importance of Education in Hindi

नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपका कैरियर जानकारी में। आज के ब्लॉग के जरिये आपको बताने वाले हैं मानव जीवन में शिक्षा के महत्व के बारे में। शिक्षा से मानव जीवन में अब तक क्या – क्या बदलाव आये हैं। तो दोस्तों आप भी शिक्षा के महत्व को समझना चाहते है। तो इस ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़िये।

Essay on Importance of Education in Hindi

Essay on Importance of Education in Hindi

शिक्षा का अर्थ –

शिक्षा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शिक्ष धातु से हुई है। जिसका अर्थ है सीखना और सिखाना। अर्थात शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली वह प्रक्रिया है , जो बच्चे के जन्म लेने से लेकर उसकी मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है। शिक्षा के जरिये मनुष्य के ज्ञान एवं कला कौशल में वृद्धि करके उसके अनुवांशिक गुणों को निखारा जा सकता है और उसके व्यवहार को परिमार्जित किया जा सकता है। शिक्षा के माध्यम से बालक का सर्वांगीण विकास किया जाता हैं। शिक्षा स्वयं को पहचानने व अपनी शक्तियों को पहचानने की क्षमता का विकास करते हैं।

‘ शिक्षा वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मनुष्य के व्यवहार में परिवर्तन आता है। ‘

‘ स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करने का कार्य शिक्षा करती है। ‘

डॉ राधाकृष्णन ने शिक्षा को परिभाषित करते हुए कहा था कि –

” शिक्षा व्यक्ति को और सामाजिक के सर्वतोमुखी विकास की सशक्त प्रक्रिया है। “

डॉ ए. एस. अलेतकर के अनुसार –

वैदिक युग से लेकर आज तक भारत में शिक्षा का मूल तात्पर्य यह रहा है कि शिक्षा प्रकाश का वह स्त्रोत है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्शक करती है। “

शिक्षा का महत्व –

” शिक्षा ज्ञान का वह भंडार है जो मनुष्य को मानव बनाती है और उसे पशु की तरह स्वार्थ परायण होने से रोकती है। ” इसलिए विद्या विहीन व्यक्ति को पशुतुल्य कहा गया है। शिक्षा ही मनुष्य के कर्तव्य को समझाती है। और उसे सच्चे अर्थों में इंसान बनाती है। उसे खुद का और समाज का विकास करने का भी अवसर देती है।

शिक्षा samraddhi की कुंजी है । शिक्षा हमें एक अच्छा और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करती है। मनुष्य जन्म से ही सुख और शांति के लिए प्रयत्न करता है। जब से स्रष्टि का आरंभ हुआ है वो तब से ही अपनी उन्नति के लिए प्रयत्न करता आया है। लेकिन उसे पूरी तरह शांति शिक्षा से ही मिली है। शिक्षा से ही मनुष्य की सामाजिक और नैतिक उन्नति हुई थी, और वह आगे बढ़ने लगा था। प्राचीन काल में शिक्षा का अर्थ व्यापक रूप में लिया जाता था , शिक्षा आत्मविकास , आत्ममंथन अथवा सुधार की प्रक्रिया थी जो जीवन पर्यंत चलती थी।

विद्या एक ऐसा धन है, जिसे ना तो चुराया जा सकता है ना ही किसी के द्वारा छीना जा सकता है। इसको बांटने पर यह कम नहीं होती बल्कि बढ़ती है। शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को उच्च स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है और समाज में लोगों के बीच सभी भेदभावों को हटाने में मदद करती है। यह हमारी अच्छा अध्ययन कर्ता बनने में मदद करती है और शिक्षा के महत्व को एक तथ्य से समझा जा सकता है कि शिक्षित लोगों को जो अकुशल हैं, उनके मुकाबले खुशहाल जीवन जीते हैं। अच्छी शिक्षा के साथ हम एक महान कैरियर बना सकते हैं और अधिक पैसा कमा सकते हैं। शिक्षा के महत्व को भी इस तथ्य से देखा जा सकता है कि कम शिक्षित लोग छोटी नौकरियां करते हैं और कम वेतन अर्जित करते हैं।

शिक्षा और ज्ञान न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति की सोच का पोषण करती है और उन्हें जीवन में सोचने, कार्य करने और आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करती है। शिक्षा लोगों को सशक्त बनाती है और उन्हें काम के संबंधित क्षेत्रों में रहने और अनुभव के सभी पहलुओं में कुशल बनने में मदद करती है। शिक्षा से मानवीय गरिमा और व्यक्तित्व का विकास होता है। नैतिक शिक्षा का अर्थ होता है कि बच्चे की शारीरिक , मानसिक और नैतिक शक्तियों का सर्वोतमुखी विकास हो ।

आधुनिक शिक्षा प्रणाली से आप क्या समझते हैं ?

भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परतंत्र काल की शिक्षा प्रणाली माना जाता है। अर्थात कालान्तर में भारत में पश्चिम का राजनैतिक प्रभाव द्रुत गति से फैल गया। मैकाले द्वारा प्रतिपादित शिक्षा प्रणाली ने जहां अंग्रेजों की स्वार्थ-सिद्धि में सहायता की, वहीं भारतीयों का आत्मनिर्भरता की भावना तथा चरित्र निर्माण से दूर कर केवल उदरपूर्ति के लिए संघर्षरत बना दिया। इस प्रणाली को मैकाले ने जन्म दिया था। इस प्रणाली की वजह से आज भी सफेद काॅलरों वाले लिपिक और बाबू ही पैदा हो रहे हैं। इस शिक्षा प्रणाली की वजह से विद्यार्थियों का शरीरिक और आत्मिक विकास नहीं हो पाता है।

जब हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था । उसके बाद हमारे लोगों का ध्यान नई शिक्षा प्रणाली पर गया क्योंकि ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली हमारे लिए अनुकूल नहीं थी महात्मा गांधी जी ने इस विषय में कहा था कि शिक्षा का अर्थ बच्चों में सारी शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्तियों का सुधार व विकास करना होता है ।

आधुनिक शिक्षा प्रणाली के दोष –

आधुनिक शिक्षा प्रणाली का कोई उद्येश्य नहीं है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली की खूबियों एवं विशेषताओं के साथ-साथ इसकी कुछ कमजोरियाँ भी हैं जिसका हमारे समाज एवं देश पर बुरा प्रभाव दिखाई पड़ रहा है।  आधुनिक शिक्षा प्रणाली को रोजगार को सामने रख कर बनाया गया है। अर्थात इसमें कौशल और हुनर का अभाव है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय डिग्रियाँ बाँटने वाली एजेंसियाँ बन गई हैं। आज शिक्षित लोग बेरोजगार हो रहे हैं , अशिक्षित लोगों का समाज में मान सम्मान हो रहा है । इसलिए हमें अपने राष्ट्र के नागरिकों में सर्वागीण विकास करना है जिससे मानव सत्य व असत्य में अंतर स्पष्ट कर सके।

आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लाभ –

शिक्षा किसी राष्ट्र अथवा समाज की प्रगति का मापदंड है । जो राष्ट्र शिक्षा को जितना अधिक प्रोत्साहन देता है वह उतना ही विकसित होता है ।  वर्तमान शिक्षा प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें महिला साक्षरता की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। महिला साक्षरता बढ़ने से आज समाज में महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ हुई है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली एक संशोधित एवं अद्यतन शिक्षा प्रणाली तो है ही यह ज्ञान-विज्ञान के नए-नए विषयों को भी समाहित करती है। कंप्यूटर शिक्षा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जिसने मानव जीवन को सहज, सुंदर एवं सुविधाजनक बनाया है। तथा आधुनिक शिक्षा में समानता अर्थात लिंग भेद , जन्म, रूप अमीर, गरीब आदि के आधार पर बच्चों में अलगाव नहीं किया जाता है। यहाँ पर विद्यार्थियों को समान शिक्षा दी जाती है।

निष्कर्ष –

शिक्षा मानव जीवन में एक अहम भूमिका निभाती है। क्योंकि यह हमारे लिए विकास का रास्ता खोलती है। शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को उच्च स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है और समाज में लोगों के बीच सभी भेदभावों को हटाने में मदद करती है। शिक्षा मानव के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक , बौद्धिक ,शारीरिक व मानवीय गुणों का विकास करती है। इसलिए समाज में प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। शिक्षा एकमात्र आधार है जिस पर मानव जाति का भविष्य निर्भर करता है ।

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