गाय पर हिन्दी में निबंध | गाय पर निबंध – Essay on Cow in Hindi | Cow par nibandh 10 line in Hindi – Essay on Cow 15 lines

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Essay on Cow explain in Hindi

Hiii फ्रेंड्स स्वागत है आपका कैरियर जानकारी में। दोस्तों आज इस ब्लॉग के जरिये आपको बताने जा रहे हैं गाय के बारे में। जोकि प्राचीन काल में हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। तथा गाय का धार्मिक कार्यों में बड़ा ही महत्व माना गया है। दोस्तों छोटे बच्चों की परीक्षा में गाय का निबंध अक्सर पूछ लिया जाता है। यदि आप गाय के निबंध पर पूरी जानकारी चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़िये।

Essay on Cow in Hindi

गाय पर निबंध – Essay on Cow in Hindi

गाय एक मादा पालतू जानवर है , जिसे हिंदू धर्म में माँ का दर्जा दिया गया है। गायों का उल्लेख हमारे वैदिक पुराणों, वेदों में भी मिलता है। प्राचीन काल से ही गाय मनुष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। जिस प्रकार शहर के लिए गाँव अत्यंत आवश्यक है उसी प्रकार गाँव के लिए गाय अति आवश्यक है। प्राचीन काल में गाय को अघन्या कहा गया है।

पहले वस्तुओं का विनिमय करने के लिए मुद्रा नहीं गाय का प्रयोग करते थे। जिस घर में सर्वाधिक गाय होती थी, वह घर सम्रद्धशाली माना जाता था। भारत में गाय को पवित्र पशु माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म में गौ माता की पूजा भी की जाती है। गाय दयावान व शांत स्वभाव वाला जानवर है। अत: गाय धार्मिक, आर्थिक व वैज्ञानिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।

गाय की शारीरिक संरचना

(1) गाय का एक मुँह तथा लंबी नाक होती है।

(2) गाय के दो कान तथा दो आँखे होती हैं।

(3) गाय के दो सींग तथा एक पूँछ होती है।

(4) गाय के दो नथुने होते हैं।

(5) गाय के चार थन तथा चार पैर होते हैं। इसलिए इसे चौपया जानवर कहते हैं।

(6) गाय की खुर होते हैं, जो पैरों में जूते की तरह काम करके चोट लगने से बचाते हैं।

(7) गाय के कई रंग जैसे सफेद, काली, चितकबरी तथा बादामी रंग की होती हैं।

गाय का धार्मिक महत्व

गाय को हिंदू धर्म में गौ माता के नाम से जाना जाता है। गाय की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गाय के शरीर में तेतीस करोड़ देवी देवताओं का निवास है। इन प्रमुख कारणों की वजह से गाय को देवी का दर्जा दिया गया है। और दीपावली के दूसरे दिन गौवर्धन पूजा भी मानते हैं। तथा गाय के गोबर से पूरे घर को लीपकर शुद्ध किया जाता है। कई पवित्र स्थलों पर भगवान जी का अभिषेक गाय के दूध से किया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण जी को गाय अति प्रिय थी। बचपन में वह हमेशा गाय का दूध पीते थे। और गायों से अधिक प्रेम होने के कारण इनका नाम गोपाल पड़ गया था।

(1) गौ माता हमारी सर्वोपरि श्रद्धा का केंद्र है।

(2) गौ भारत संस्क्रति की आधार शिला है।

(3) गौ रक्षा हमारा परम धर्म है।

(4) महात्मा गांधी जी ने कहा था कि भारत की सुख संपदा गौ से जुड़ी हुई है।

वैज्ञानिक दृष्टि से गाय का महत्व

गाय का वैज्ञानिक नाम Boss Indicus है। गाय का दूध गुणवत्ता के मामले में आदि जानवरों से कई गुना पौष्टिक , ऊर्जावान तथा शक्तिशाली होता है। आज भले ही गाय के दूध का उत्पादन भैंस से कम होता हो परंतु इसके दूध से बने उत्पादों का कोई मुकाबला नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सभी जानवरों में गाय ही एक ऐसा जानवर है जो आक्सीजन लेता है और आक्सीजन छोड़ता है। जबकि मानव सहित अन्य पृथ्वी के जीवधारी जैसे मानव और पशु ( गाय को छोड़ कर) आक्सीजन लेते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। तथा पेड़ – पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और आक्सीजन छोड़ते हैं।

एक शोध के अनुसार पता चला है की गाय के घी का इस्तेमाल हवन मे करने से आक्सीजन बनती है।

गाय के गोबर में विटामिन B12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रेडियोधर्मी को सोखता है। कहते हैं गोबर के उपले जलाने से कीटाणु, मच्छर , बिमारियाँ आदि दूर हो जाती है। तथा दुर्गंध भी दूर होती है। गोबर और गौमूत्र फसल के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। गोबर और गौमूत्र खेतों में डालने से यह खाद का काम करता है। तथा अनाज की फसल की गुणवत्ता बनी रहती है। गाय की मृत्यु के बाद भी गाय के सींग 45 साल तक सुरक्षित बने रहते हैं। पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, घी, मक्खन, गौमूत्र तथा गोबर से बनता है। पंचगव्य रोग निरोधक के रूप में कार्य करता है। कैंसर वाले व्यक्तियों को भी पंचगव्य सेवन करने के लिए दिया जाता है।

गाय की प्रमुख नस्लें

गायों की कई प्रकार की नस्लें होती हैं जो कि निम्नवत हैं –

(1) साहीवाल

यह गाय की एक प्रकार की नस्ल है जो कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा , दिल्ली, बिहार, और पंजाब में अधिकतर देखने को मिलती है।

(2) गिर

गाय की एक प्रकार की नस्ल जोकि गुजरात के गिरि क्षेत्र में पाई जाती है। यह भारत की सबसे अधिक दूध देने वाली गाय है। कम से कम 40 – 50 liter दूध प्रतिदिन देती है। इसी कारण गिरि प्रकार की नस्लों की गायों की मांग विदेशों मे अधिकतर रहती है।

(3) दज्जल और धन्नी

यह प्रजाति मुख्यत: पंजाब में पाई जाती है। ये बहुत फुर्तीली होती हैं।

(4)मेवाती, हासी और हिसार

ये नस्लें मुख्यत: हरियाणा की हैं।

(5) राठी, थापरकर और कांकरज प्रजाति की नस्लें

राठी राजस्थान की मुख्यत: नस्ल है। यह प्रतिदिन 6 – 8 liter दूध देती हैं। थापरकर जोधपुर व जैसलमेर में अधिकतर होती हैं । तथा कांकरज बाड़मेर और सिरोही में दिखती हैं।

उपसंहार ( Conclusion)

गाय शाखाहारी जानवर है। गाय की सेवा हमें प्रेम भाव से करनी चाहिए। गाय ग्रामीण परिवेश में अर्थव्यवस्था की बैक बोन मानी जाती है। गाय के लिए हम सभी को हरा भरा वातावरण देना आवश्यक है। चूंकि आजकल लोग अपने लालच में पेड़ – पौधों को काट रहे हैं। जिससे भूमि बंजर हो रही है। इस लिए हमें यह ध्यान देना जरूरी है कि वातावरण स्वच्छ, शुद्ध और हरा भरा नही रखेंगे, तो जानवरों के साथ – साथ मनुष्य को भी खतरा है। हमें गायों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिये। उन्हें जरूरत के अनुसार समय समय पर भोजन और पानी देना चाहिए।

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